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Tuesday, May 28, 2013

नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना

कैसे काली रात कटेगी , झर-झर बरसे रैना
नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना
तुझसे बिछड़ के मरना क्या और क्या है मेरा जीना
नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना

देख बताने आये है सब दिन ये साल महीना
नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना
दूर भी है और पास भी तू यह जहर है मुझको पीना
नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना

इतना उधड चूका हूँ अब तो मुश्किल हो गया सीना
नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना
सारे रस्ते देख लिए हैं बैठ लिया हर झीना
नैनो में सपने, मेरे सपनों में नैना

दीपक


जी ले जीवन को जी भर के , बड़ी ये जिम्मेदारी है

जी ले जीवन को जी भर के , बड़ी ये जिम्मेदारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
आना जाना चक्र पार्थ ये हाहाकारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
ना कुछ लाया ना कुछ छोड़ा , महज ये मोह बीमारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
तम ,रज और सत तीन गुणों की सोच हमारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
तेरा जो  कल था ,आज है मेरा ,सतत परिवर्तन जारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
लोभ मोह माया में लिपटी सोच बेचारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
यत्र -तत्र -सर्वत्र व्याप्त प्रभु सत्ता न्यारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है
कर्म करे जा फल ही इच्छा एक लाचारी है
आज है उसकी बारी , कल फिर तेरी बारी है

दीपक  

सागर जैसा मन मेरा,उन्मुक्त किनारों वाला

सागर जैसा मन मेरा,उन्मुक्त किनारों वाला
हर बूंद समाहित कर कर के मैं बूंद बूंद को सागर करता
बूंद बूंद फिर टूट टूट कर बादल को सब वापस करता
रह जाता खारापन मुझमे मधुर तृप्ति को वापस करता
ताप-कोप को सहने वाला शीतलता लौटने वाला
सागर जैसा मन मेरा,उन्मुक्त किनारों वाला

दीपक 

Saturday, May 25, 2013

बर्दाश्त नहीं कर सक

बर्दाश्त नहीं कर सकता कि कोई आकर सिखाए इश्क के गुर मुझको
दिल को दवात  ,लहू को स्याही, तेरे चेहरे को ख़त बनाकर
लिखता रहा हूँ आज तक
खुद को खुद में डुबोकर सीखता रहा हूँ आज तक 

पंछी बन, एक सुबह मेरा मन

पंछी बन, एक सुबह मेरा मन
उड़ता गया ,ढुंढने अद्भुत अंत गगन
ऊपर से देखा
व्यापारी बन ,बेच रहा तन मन धन
बदले में मिलते देखा घोर निराशा और क्रंदन

प्रेम वासना के बाजार में बिक रहा रुपये का सेर
और राजनीती की दौड़ में दोड़े सर्कस के सब शेर
सबने टिकट लिया पश्चिम का ,बहरी है आवाज
हुई अहिल्या कातर सी और हिजड़ा हुआ समाज

है सरे आम फुटकर में नीलामी उच्च विचारों की
कोड़े खाती लुटती पिटती है टुकड़ी संत बेचारों की
अतिभय व्यापी सत्य बेचारा ठोकर खाता घूम रहा
और व्यभिचारी असत्य रात दिन शोहरत का मुंह चूम रहा

होड़ लगी सबसे ज्यादा आगे रहने वालों की
बहुत ही ज्यादा पीछे रह गयी ममता इन इंसानों की
मैं चिल्लाया रोको रोको गलत हो रहा रोको सब
एक बाज झपट्टा मार ले चला ,बहुत हो गया मुन्ना अब





बदला जन गन मन का देश

दल बदला ,दंगल बदला ,बदला जन गन मन का देश
मन सूखे ,सुखी नदियाँ हे उच्छल जलधि नरेश
टूट टूट क्यूँ बिखर गया अधिनायक अखंड प्रदेश
हे भारत भाग्य विधाता पूछे मेरा अंतर क्लेश
कब दोगे शुभ आशीष मिटेगा कब ये अंतस द्वेष ?
रावन जय गाथा गाता है पहन के तेरा भेष
मति भ्रम दूर करो मनहारी भेजो दिव्य सन्देश

दीपक 

तिरंगा

मुझसे एक बार मेरे मित्र ने हमारे राष्ट्र ध्वज का दर्शन पूछा , सही उत्तर मुझे नहीं मालूम था फिर भी मेरे कवि ह्रदय ने उस वक़्त जो पंक्तियाँ मेरे मित्र को बताईं आपके सम्मुख रखता हूँ . आपमें से जो भी इसके मर्म को समझें कृपया इसे दूसरों को भी सुनाये .


ऊपर है भगवा सा जो रंग , हर हिन्दू को प्यारा है
नीचे हरा भरा जो रंग है ,हर मुस्लिम का दुलारा है
इन दोनों के बीच शांति का रंग श्वेत फहराता है
तीन रंग का प्रेम-बंध ये एक तिरंगा न्यारा है
मिलकर रहें सदा सब बंधु .नील चक्र बतलाता है
करें खोज प्रकाश की प्रतिपल ऐसा देश हमारा है

दीपक 

Friday, May 24, 2013

बादल पानी हो गया ,पानी बादल हो गया

बादल पानी हो गया ,पानी बादल हो गया
तेरे इश्क के रंग नहीं बदले तो क्या ,बदल गया एक साल में
मैं मैं न रहा ,तब भरा था आज खाली  हो गया



दिल में पनपता है

दिल में पनपता है
सीने में धड़कता है 
हूक सी उठती है जब
तो आँखों में पिघलता है
दर्द जब हद से परे हो जाता है
तो आँखों से झलकता है
चेहरे को भिगोता हुआ
इबादत करते हाथों पे आ गिरता है

मेरे ये अश्क भी तो भाप बनके उड़ते होंगे
इस खुश्क मौसम में थोड़ी तो नमी पैदा करते होंगे
कभी ये भी तो बादल का हिस्सा बन उड़ते होंगे
किसी खेत में बारिश बनके बरसते होंगे
गेहूं की बालियाँ जब खेतो में लहलहाती होंगी
कुछ दाने यक़ीनन मेरे अश्क से भी बनते होंगे

इन दानों को कोई भूखा बच्चा जब खायेगा
खूब हंसेगा ,खेलेगा और मां के मन को भायेगा

दर्द को ,आंसू को, खुशियों में ऐसे बदला जाता है
समझ गया तेरे आगे हर सिर क्यूँ झुक जाता है
समझ गया तेरे आगे हर सिर क्यूँ झुक जाता है

दीपक




Thursday, May 23, 2013

जो दुश्मनी के दोस्त हैं ,ऐसे दोस्तों का साथ छोड़ देना

जो दुश्मनी के दोस्त हैं ,ऐसे दोस्तों का साथ छोड़ देना
बीच दरिया में वरना ये तुम्हें छोड़ देंगे
चिल्लाओगे ,रोओगे फिर भी नहीं होंगे ये
डाली टूटने से पहले हाथ तुम्हारा छोड़ देंगे  

Wednesday, May 22, 2013

सांसे गिन रहा था अपनी बैठकर ,सिवाय एक साँस के हर साँस पे बेवफा तेरा, बस तेरा नाम आया

सांसे गिन रहा था अपनी बैठकर ,सिवाय एक साँस के हर साँस पे बेवफा तेरा, बस तेरा नाम आया 
दुआ मांगी थी तेरे वास्ते खुदा से एक रोज इसलिए ,काफ़िर की एक साँस पे उसका भी नाम आया

Tuesday, May 21, 2013

एक जीवन भी कम पड़ जाता और कहाँ से लाऊं मैं

एक जीवन भी कम पड़ जाता और कहाँ से लाऊं मैं
सेवा में हर शब्द समर्पित, नव गीत कहाँ से लाऊं मैं

लिख लिख कर है धन्य लेखनी,रक्त कहाँ से लाऊं मैं
देना तू आशीष सदा मां सत पथ से ना डिग जाऊं मैं

जब जब जीवन मिले भारते तेरा ही कहलाऊँ मैं
शीश नवाऊँ ,शीश कटाऊँ तुझसे दूर न जाऊँ मैं


दीपक


पञ्च रंग की नाटकशाला यह संसार हमारा है

पञ्च रंग की नाटकशाला यह संसार हमारा है
काम,क्रोध,मद,लोभ,मोह में जाता जीवन सारा है

जीवन उसका नाम है जो काम  देश के आता है
स्वाभिमान से जीता है और देता सबको सहारा है

अपने लिए जीने वाले को मनुष्य नहीं कह सकते है
मानव जीवन तो वो है जिसको सबका जीवन प्यारा है


मैं टूट कर गिरुं भी तो आईने की तरह

मैं टूट कर गिरुं भी तो आईने की तरह
तेरे चेहरे को हजार कर लूँ ,तेरे दुश्मन पे मैं वार  कर दूँ

मेरे क़त्ल की गवाही देने भी न आना कोई गम नहीं ए दोस्त
मुझे आदत है कि  दो आंसुओं को मैं चार कर लूँ


दीपक





सांसे गिन रहा था अपनी बैठकर

सांसे गिन रहा था अपनी बैठकर  ,सिवाय एक साँस के हर साँस पे बेवफा तेरा बस तेरा नाम आया
दुआ मांगी थी तेरे वास्ते खुदा से एक रोज इसलिए ,काफ़िर की एक साँस पे उसका भी नाम आया 

Monday, May 20, 2013

जो पहले से पता हो हाल ए दिल यार का, तो कहाँ इश्क करने का मजा आता है। घर मालूम हो खुदा का जिसको , उसे क्या खाक मस्जिद में जाने का मजा आता है।।

जो पहले से पता हो हाल ए दिल यार का, तो कहाँ  इश्क करने का मजा आता है।
घर मालूम हो खुदा का जिसको , उसे क्या खाक मस्जिद में जाने का मजा आता है।।
मंजिल को चूमने की जल्दी नहीं हमको ,हमें तो रास्तों पे झूमने का मजा आता है।।।

कि इससे ज्यादा इश्क का इम्तेहान क्या लोगे उसी से छुपाने का ये फन है जिसे बताना है राज दिल का

 कि इससे ज्यादा इश्क का इम्तेहान क्या लोगे 
 उसी से छुपाने का ये फन है जिसे बताना है राज दिल का 

मौला क्यूँ मुक़द्दर के नाम पे तेरी दुनिया बाँट दी जाती है

१/मौला क्यूँ मुक़द्दर के नाम पे तेरी दुनिया बाँट दी जाती है
जब कोई जलता है तो किसी के हिस्से में रौशनी आती है

२/न हर महफ़िल में इश्क होता है, न हर चिराग ही धुआं देता है
हम फिर भी जिद में बैठे हैं कि वो बेवफा नहीं

कोई रोके हमें खुदा का वास्ता देकर
कि हर मस्जिद में मिलता है बस इन्सान यक़ीनन खुदा नहीं 

Saturday, May 18, 2013

मोहब्बत की उचाईयों को छूने वाले, दिल की गहराइयों में डूब जाते है

मोहब्बत की उचाईयों को छूने वाले, दिल की गहराइयों में डूब जाते है
और डूबते हैं भी हैं वही आशिक, जो अच्छी तरह तैरना सीख जाते है

मेले में लोगों से घिरे लोगों से पूछ कर देखो
मेले उजड़ जाने के बाद ये कैसे तनहाइयों में डूब जाते है ?







जग जा रे मन भोर भई कब कौन उठावन आयेगा .

जग जा रे मन भोर भई अब कौन उठावन आयेगा .
तारे रीते , चमका सूरज , तू सोता रह जाये ना
कलरव करते पक्षी अम्बर को छूके कबके लौट चुके
जागा जग सारा तू भी उठ ,आंखे मलता रह जाये ना
बीत गए युग ,बदले मौसम ,कौन जगावन आयेगा
हिम्मत कर और तान हौसला , करवट बदले क्या पायेगा
देश है कातर नज़रों से रे , तेरा भी रस्ता बाट रहा
देख हक़ीक़त ,खोल ले आंखें ,सपनों में तू घुल जाये ना